मध्य भारत क्षेत्र में मध्य भारत राजस्व मण्डल अध्यादेश 1948 के अधीन राजस्व मण्डल का गठन हुआ था। विंध्य क्षेत्र में इसी प्रकार के 1948 के अध्यादश के अधीन राजस्व मण्डल अस्तित्व में आया था। पुराने मध्य प्रदेश में सेंट्रल प्रोविन्सेस बोर्ड ऑफ रेवेन्यु आडिनेन्स, 1949 मे अधीन यह न्यायालय अस्तित्व में आया। राजस्थान राज्य में भी, जिससे सिरोंज क्षेत्र नवीन मध्य प्रदेश में आया था, राजस्व मण्डल कार्य कर रहा था। केवल भोपाल राज्य ऐसा था जहॉ राजस्व मण्डल नाम की कोई संस्था नहीं थी और समस्त अपीली तथा पुनरीक्षण अधिकारिता राज्य सरकार को प्राप्त थी। राज्य सरकार ने यह अधिकार असिस्टेंट चीफ कमिश्नर को अंतरित कर दिए थे। नवीन मध्य प्रदेश राज्य के निर्माण के साथ ही म.प्र.राजपत्र (असाधारण) दिनांक 1 नवंबर 1956 में प्रकाशित अधिसूचना क्रं. 10-एक, दिनांक 1 नबंबर 1956 द्वारा नवीन राज्य के लिए राजस्व मण्डल का गठन किया गया जो विभिन्न क्षेत्रीय अधिनियमों के अधीन न्याय-दान करता था। दिनांक 1 नवंबर 1956 के असाधारण राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना क्र.-12-एक-ए द्वारा भोपाल राज्य में असीटेंट चीफ सेक्रेटरी की अंतरिम अपीली एवं पुनरीक्षण अधिकारिता इस नवीन राजस्व मण्डल को दे दी गई।
5 अगस्त 1960 के राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना क्र. 5599-2072 सात-ना-दो, दिनांक 10 जून 1960 द्वारा राज्य सरकार ने ग्वालियर को मण्डल का प्रधान स्थान नियत किया है। 9 दिसम्बर 1960 के राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना क्र. 3052-37-60, दिनांक 18 अक्टूबर 1960 द्वारा मण्डल के अध्यक्ष ने राज्य सरकार के अनुमोदन से मण्डल की बैठक के अन्य स्थान रीवा, इन्दौर, जबलपुर तथा रायपुर नियत किये हैं। अधिसूचना क्रं. 374-336 / 3-71, दिनांक 17 फरवरी 1971 द्वारा मण्डल की बैठक के दो ओर अधिक स्थान भोपाल बिलासपुर नियत किए गए हैं। इनके अतिरिक्त सागर तथा उज्जैन भी बैठक के स्थान नियत किए गए हैं।
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